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यह शरीर का गरà¥à¤®à¥€ पैदा करने का तरीका होता है. इससे शरीर हाइपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ में जाने से बचता है. यही वजह है कि जैसे ही शरीर का तापमान 35 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ यानी 95 डिगà¥à¤°à¥€ फैरेनहाइट से कम होता है, तो कंपन उठने लगती है. लेकिन कंपन किसी संजीदा बीमारी के कारण à¤à¥€ हो सकती है.
कंपन काफी परेशान कर सकती है. हो सकता है कि शरीर के किसी à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ पर या फिर पूरे शरीर पर ही कोई काबू ना रहे. कई बार इस तरह की कंपन के बाद लोग जमीन पर गिर जाते हैं और कà¥à¤› तो बेहोश à¤à¥€ हो जाते हैं. हर किसी के लकà¥à¤·à¤£ अलग अलग हो सकते हैं. कà¤à¥€ सारे लकà¥à¤·à¤£ à¤à¤• साथ देखने को मिल जाते हैं, तो कà¤à¥€ à¤à¤• à¤à¤• कर के. कंपन का दौरा कà¥à¤› सेकंड के लिठà¤à¥€ हो सकता है और कई मिनटों तक à¤à¥€ चल सकता है.
अकसर à¤à¤¸à¤¾ पानी की कमी के कारण होता है. इंसानी शरीर 70 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पानी से बना है और दिमाग का तो 90 फीसदी हिसà¥à¤¸à¤¾ पानी ही है. पानी हमारी कोशिकाओं को ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ और जरूरी पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤¤à¤¾ है और साथ ही गैरजरूरी चीजों को घोलने का काम करता है. अगर कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लंबे वकà¥à¤¤ तक पानी ना पिठया उसे लगातार पसीना आता रहे या फिर उलà¥à¤Ÿà¥€ और दसà¥à¤¤ के कारण उसके शरीर से पानी कम हो रहा हो, तब à¤à¤¸à¥‡ में शरीर का संतà¥à¤²à¤¨ बिगड़ सकता है. अगर जलà¥à¤¦ ही पानी ना पिलाया जाà¤, तो खून गाà¥à¤¾ होने लगता है और शरीर चेतावनी देने लगता है कि कहीं कà¥à¤› गड़बड़ है. à¤à¤¸à¥‡ में मांसपेशियां à¤à¤‚ठने लगती हैं और शरीर कांपने लगता है.
डीहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ यानी शरीर में पानी की कमी का सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खतरा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और वृदà¥à¤§ लोगों को होता है. उमà¥à¤° बà¥à¤¨à¥‡ के साथ साथ शरीर की संवेदनाà¤à¤‚ कमजोर होने लगती हैं. à¤à¤¸à¥‡ में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ का अहसास à¤à¥€ नहीं होता. इसके अलावा हाइपोगà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ीमिया यानी खून में शà¥à¤—र की मातà¥à¤°à¤¾ कम होने के कारण à¤à¥€ कंपन उठसकती है.
मिसाल के तौर पर यदि कोई तनाव में है, थका हà¥à¤† है, दरà¥à¤¦ से गà¥à¤œà¤° रहा है या फिर बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कॉफी पीता है, तो à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कंपन हो सकती है. चिकितà¥à¤¸à¤¾ की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में इसे फिजियोलॉजिकल टà¥à¤°à¥‡à¤®à¤° कहा जाता है. जब शरीर ठंडा पड़ने लगता है तब मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है. यह शरीर का गरà¥à¤®à¥€ पैदा करने का तरीका होता है. इससे शरीर हाइपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ में जाने से बचता है. यही वजह है कि जैसे ही शरीर का तापमान 35 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ यानी 95 डिगà¥à¤°à¥€ फैरेनहाइट से कम होता है, तो कंपन उठने लगती है.
लेकिन कंपन किसी संजीदा बीमारी के कारण à¤à¥€ हो सकती है. अकसर à¤à¤¸à¤¾ मिरगी के कारण होता है. अगर दिमाग तक ठीक से खून ना पहà¥à¤‚चे, तो à¤à¤¸à¤¾ होता है. à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को à¤à¤¾à¤°à¥€ नà¥à¤•सान हो सकता है. मिरगी का दौरा किसी à¤à¥€ वकà¥à¤¤ पड़ सकता है. इसके लिठकिसी तरह के टà¥à¤°à¤¿à¤—र की जरूरत नहीं पड़ती है. दिमागी बीमारी या फिर टà¥à¤¯à¥‚मर के चलते मिरगी का दौरा पड़ सकता है. वहीं कà¥à¤› दौरे मिरगी जैसे लगते जरूर हैं लेकिन मिरगी से इनका कोई लेना देना नहीं होता. किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£, बà¥à¤–ार या फिर दवा के कारण दिमाग पर असर पड़ सकता है और कंपन उठने लगती है.
सà¥à¤¬à¤¹ पानी पीने के फायदे
कंपन कब उठती है, इस पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना à¤à¥€ जरूरी है. कà¥à¤¯à¤¾ कंपन के दौरान वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चल रहा था या खड़ा हà¥à¤† था. अगर कंपन के कारण वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का अपने हाथों-पैरों पर नियंतà¥à¤°à¤£ ना रहे, अगर चलते वकà¥à¤¤ वह à¤à¥‚मने लगे, तो यह बà¥à¤°à¥‡à¤¨ डैमेज का संकेत है. इसके विपरीत यदि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤¥à¤¿à¤° है और कांप रहा है, तो यह पारकिंसन की ओर इशारा है. à¤à¤• अनà¥à¤¯ वजह है "à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल टà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°". यह काफी आम है और यह माता पिता से विरासत में मिलता है. 20 से 60 की उमà¥à¤° के बीच यह सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखने को मिलता है और उमà¥à¤° बà¥à¤¨à¥‡ के साथ कंपन à¤à¥€ बà¥à¤¤à¥€ रहती है. अगर कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बहà¥à¤¤ देर तक à¤à¤• ही पोजीशन में रहने की कोशिश करे, तो कंपन शà¥à¤°à¥‚ हो सकती है. जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° हाथ और बाजू कांपते हैं, कई बार सर à¤à¥€ और कà¥à¤› मामलों में आवाज में à¤à¥€ कंपन महसूस होती है.
वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से फायदा हो सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे तनाव कम होता है. जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में किसी à¤à¥€ तरह की कंपन की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ तनाव से ही होती है. कंपन उठने पर शराब और कॉफी से दूर रहना चाहिठऔर डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करनी चाहिà¤. à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ, सीटी सà¥à¤•ैन या ईईजी के बाद ही पूरी तरह वजह का पता लगाया जा सकता है.
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